मेरी इस कलम ने आज कुछ लिखने की ठानी है,
ये तो फिर वही हिन्दू मुसलमान की कहानी है।
क्य़ो आज फिर है धर्म और मज़हब के बीच लड़ाई,
असल में मकसद दोनों का ही है शांति और भाईचारे की बड़ाई।
ना हम पहले हिन्दू हैं ना मुसलमान हैं,
रिश्ता है प्राथमिक जो कहे सर्वप्रिय हम सब एक इंसान हैं।
आज सबके हाथ में क्यों तलवार और छुरी है,
ऊपरवाला नहीं सिखाता लड़ना ये तो इंसानो की ही मज़बूरी है।
अल्लाह मेरा भगवान तेरा गीता मेरी कुरान तेरा आखिर क्यों ये बंटवारा है,
धर्मों के बीच दंगे कराना तो उस मुखोटे के पीछे छिपे आतंकवादी का सहारा है।
हां नाराज़ तो है वो अल्लाह वो भगवान हमसे वरना अपने दरवाज़ें यूं ना बंद करते,
वो भी पूछ रहा है आखिर भाई ही भाई से क्य़ो है लड़ते।
यही मौका है सुधर जा ए इंसान।
वरना धर्म के नाम पर यूं ही देश जल जाएगा,
फिर अपनी इस जीत का जश्‍न क्या कब्र ओर राख पर मनाएगा?

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Photo courtesy: https://www.instagram.com/abhi_sheikh_chhilli/

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