कुछ शिकायतें खुदसे, तो उस खुदा से हैं
कुछ हसरतें ज़िंदगी से , तो कुछ मौत से हैं।
एक समझौता किया है वक़्त के साथ तो एक रिशता यादों के साथ भी निभना है,
हर रोज़ एक नई कहनी शुरू क़रते हैं की हर नई कहनी का वही पुराना अफ़साना है।
नए ज़ख़्म तो भर रहें हैं, की पुराने ज़ख़्मों को थोड़ा और कुरेदना है,
पल पल तो हम गिन कर गुज़ार रहें हैं, के पुराने लम्हों को थोड़ा और समेटना है।
कुछ शिकायतें इन ख़्वाबों से, कुछ शिकायतें इन हदों से, तो कुछ इन सितारों से है।
कुछ सवाल इस तन्हाई से,तो कुछ उन महफ़िलों से है।
शिकायतें कुछ इन आँसुओं से, तो कुछ इस मुस्कुराहट से हैं।
कुछ शिकायतें इन दूरियों से , तो कुछ कुरबत से हैं ।
कुछ शिकायतें नादानियों से , तो कुछ इखलास से हैं।
लेकिन, मुख़्तलिफ़ नहीं हैं मेरी शिकायतें,
हर दूसरी रूह का यही हाल हाई मानो
सबसे बड़ी शिकायत तो यही है ;
शिकायतें तो हम हज़ारों लेकर बैठे हैं , लेकिन उन्हें सुन ने वाला कोई नहीं हैं।
The perplexity of human mind, the innocence of human heart!
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Picture Courtesy : http://www.instagram.com/abhi_sheikh_chhilli/

