यदि कुछ हो तो
यदि समेटना हो तुम्हारे अस्तित्व को कल्पनाओं के साथ,तो किससे समेटूं?क्या दुनियावी…
ब्रह्मांड
मैंने स्वयं को दो ब्रह्मांडों के मध्यस्थ पाया है,एक से दूसरी छोर…
तुम पर एक कविता।
बरसों से किताबों में,आशिकों ने वस्ल के मायने लिखेहिज्र की रातें लिखीमोहब्बत…

