जिस्म और माया की बातों से अलग,चाहतों और नफ़रतों की दुनिया से दूर,एक जहाँ है।
उस पहाढ़ के परे,उन बादलों के बीच।
मौसम हर रोज़ बदलते नहीं हैं वहाँ,
सूरज की किरने चुभतीं नहीं हैं वहाँ।
जब थक जाओ इस भागती हुई ज़िंदगी से,
सुकून खोजते हुए, तुम आना मेरे पास,
उस पहाढ़ के परे,उन बादलों के बीच।
वहीं उन ख़ामोशियों में बैठ,साथ उस सूरज को डूबते देखेंगे।
मैं कुछ कहूँगी नहीं के बात तुम भी ना करना
सन्नाटों में छुपे उस शोर को समझने की कोशिश करेंगे।
लफ़्ज़ों से नहीं, नज़रों से बातें करेंगे।
उस पहाढ़ के परे,
उन बादलों के बीच।।

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Photo Courtesy : https://www.instagram.com/p_paradox07/

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