नए चमकदार कपड़े पहने
बच्ची का हाथ थामे
एक सांवला अधेड़ आदमी
उससे पूछ रहा था
“क्या बनना चाहती हो?”
लड़की फ्टफ्ट बोली “पायलट”
सुनते ही आदमी मुस्कुराया
आंखें खुली, चमकी
छाती चौड़ी हो गई
“शाबाश! मेरी बेटी आसमान छुएगी”

सुनकर
मैंने पूछा ” तुम आदमी आम हो ना?”
पहले थोड़ा संभला, फिर मुस्कुराया
“हां क्यों?”
तुम्हारे सपने गवाह है ,
तुम्हारी सामान्यता के।
और तुम बिल्कुल दिखते हो सामान्य।
आम लोगों के सपने साधारण नहीं होते,
हो भी नहीं सकते।
वो तो हवा से बातें करना चाहते हैं
दुनिया बदलना चाहते हैं
बादलों सा तैरना चाहते हैं
आसमान छूना चाहते हैं।

मिट्टी में थमे हाथ,
ज़िन्दगी के
चमत्कारों में
विश्वास रखते हैं।
बचपन की ख्वाहिशों में जीते
चार पहियों की मांग कर
दो में ही खुश रह जाते हैं।
जो विरासत में आगे
की पीढ़ियों को देते
हैं केवल अपने सपने।
मैं जानती हूं तुम आम हो
और ये भी
की दुनिया खास लोगों से
नहीं चलती।

सबसे ऊपर उठने की चाह लिए,
साधारण लोग हो जाना चाहते हैं
असाधारण,
नैतिकता पर लड़ना चाहते हैं,
ज़िन्दगी की बिछी हुई
कारीगरी को मरोड़ कर
अपना रास्ता बनाना चाहते हैं,
बाकी लोगों को
राह दिखाना चाहते हैं।
सामान्य लोग अक्सर खुद को बनाना
चाहते हैं अलग।
दुनिया की परंपरा तोड़,
अपने हाथ लाल करना चाहते हैं
दूर इस सोच से कि
अलग थलग, कुछ खास बनने की कोशिश
उन्हें सब जैसा ही बनाती है- आम।

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